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पितरो का महिना चल रहा है---कई जातक पितृ दोष के बारे में जानना चाहते है उनके लिए ये लेख।

--------------पितृ दोष-------------

हमारी भारतवर्ष की परम्परा के अनुसार हर इंसान तीन ऋण से ग्रस्त होता है।
१---देव ऋण।
२---ऋषि ऋण।
३---पितृ ऋण।
मनु आदि ऋषियों ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति को इन तीनो ऋणों से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए ताकि मोक्ष की प्राप्ति हो।
पितृ ऋण इन तीनो में प्रमुख है,क्योंकि पितृ अर्थात हमारे पूर्वजो के पुण्य कर्म अथवा पुण्य अंश से ही हमारी उत्पत्ति हुई है। यदि वे हमारी उत्पत्ति नहीं करते तो मोक्ष प्राप्त कर लेते, किन्तु वंश के विस्तार के लिए उन्होंने ब्रह्मचर्य का खंडन व् वीर्य का क्षरण करके हमारी उत्पत्ति की है। अतः हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें श्राद्ध ,तर्पण आदि से कृतार्थ करें, ताकि वे मोक्ष के भागी बन सके और हम उनके ऋण से मुक्त हो सके।
जो लोग दान,तर्पण,श्राद्ध नहीं करते ,पितृ गन उनसे कुपित रहते हैं जिसके कारण परिवार के लोग दुखी और मानसिक कष्ट में रहते है।
जन्म-कुंडली के अनुसार सूर्य पिता का कारक और बृहस्पति बड़े बुजुर्गो का कारक होता है। उक्त दोनों ग्रहों का अल्पबलि ,नीच या पाप-युक्त होना, पितृ दोष का सूचक होता है। ये दोष पूर्वजन्म कृत पाप का सूचक होता है जो हमे इस जन्म में प्रभावित करते हैं।
प्राचीन ग्रंथो में ऐसे अनेक ग्रह योगो का उल्लेख है जो पितृ दोष के सूचक हैं। इनमे से कुछ प्रमुख योग यहाँ नीचे दे रहा हूँ।
१---सूर्य का नीच राशी में मकर या कुम्भ के नवमांश में होना।
२---सूर्य का या सिंह राशी का पाप कर्तरी योग में होना।
३---सूर्य+राहु या सूर्य+केतु की युति होना।
४---लग्नेश का अल्पबली होकर दशम (पिता) के भाव में होना।
५---दशमेश का षष्ठ ,अष्टम या द्वादश भाव में होना व् लग्न का अल्पबली होना।
६---सूर्य या गुरु का ६,८,१२ भाव में होना,
७---दशम भाव में पापी ग्रह होना या दशम भाव का पापकर्तरी योग में होना।
८---लग्न एवं त्रिकोण में सूर्य,शनि व् मंगल का होना तथा ८ या १२ भाव में राहु और गुरु का होना।
९---किसी का जन्म गंड-मूल नक्षत्र में होना ख़ास करके मघा नक्षत्र में होना जिसका स्वामी खुद पितृ है।

-----------पितृ दोष निवारण के उपाय-----------
१---गया तीर्थ में वेदोक्त रीति से पूर्वजो का श्राद्ध तर्पण कराना चाहिए।
२---गंड-मूल नक्षत्र में जन्म हुआ हो ,तो जन्म नक्षत्र के मन्त्र का २८००० जप कराकर दशांश हवन करना चहिये।
३---अमावस्या तिथि के स्वामी पितर है, अतः इस दिन पूजा-पाठ, दान -पुण्य आदि करने चाहिए।
४---पूर्वजो की पुण्य तिथि पर गरीबो को अन्न वस्त्र का दान करे।
५---पीपल के वृक्ष को पितरो का प्रतिनिधि माना गया है इसलिए इस पर नित्य जल चढ़ाने से भी पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
६---श्राद्ध पक्ष अथवा सर्व पितृ अमावस्या के दिन पूर्वजो को याद करे और उनके निमित्त श्राद्ध करे।
७---जब भी श्राद्ध करे टिल,जौ ,गोपीचंदन, कुश,गंगाजल आदि का उपयोग अवश्य करे। ये वस्तुएं मोक्ष का कारक है इसलिए पितरो को प्रिय हैं।

बाकि सब अपने गुरु या मार्ग-दर्शक से पुछ कर करें।