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गुरु बृहस्पति का सिंह राशि प्रवेश -- धर्म की जय, अधर्म का नाश ....पढ़ें अपना राशिफल व उपाय.. 
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गत 14 जुलाई मंगल वार को प्रातः 6:23 मिनट पर गुरु वृहस्पति जी का सिंह राशि में प्रवेश हो चुका है ।
गुरु प्रत्येक राशि में लगभग एक वर्ष तक संचार करते हैं । अतः 7 अप्रैल 2016 तक गुरु वृहस्पति सिंह राशि पर ही संचार करेंगे ।
जब 12 राशियों के अपने सम्पूर्ण संचरण को पूर्ण कर बारहवें वर्ष सिंह राशि पर पंहुचते हैं और साथ ही सूर्य भी अपनी सिंह राशि में पधारते हैं तो राजा और राज गुरु का दिव्य संयोग धर्म की ध्वजा को ऊँचा करता है । 
यह योग धर्म की जय विजय और अधर्म का शमन करता है । 
राष्ट्र में ध्यान, योग, कथा - प्रवचन आदि यज्ञ, महायज्ञ, महाकुम्भ जैसे महान पर्व संपन्न होते हैं ।
17 -8-2015 को सूर्य के सिंह राशि प्रवेश होते ही इस वर्ष नाशिक में महाकुम्भ का पर्व प्रारम्भ होगा जो 16 सितम्बर तक रहेगा ।
मुख्य शाही स्नान -13 सितम्बर और 16 सितम्बर को सनातन प्रहरी नागा सन्यासियों , साधु -संत विद्वान महापुरुषों सहित लाखों श्रद्धालु भक्त गण "सिंहस्थ महापर्व " में स्नान,दान, जप, तप, हवन आदि श्रेष्ठ महापुण्य अर्जित कर भुक्ति मुक्ति के अधिकारी बनेंगे । धन्य है सनातन धर्म .. हिन्दू संस्कृति....... ।
सिंहस्थ गुरु के गोचर फलस्वरूप धर्मादि कार्यों में वृद्धि एवं सत्याचरण शील विद्वान ब्राह्मणों , साधु संत महापुरुषों के आदर सम्मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है । 
हिंसा, चोरी,व्यभिचार, लूटपाट आदि अनैतिक कार्य 
करने वालों का शमन होता है । 
कूटनीतिक एवं संकीर्ण विचारों के समूहों में भीषण टकराव होंगे एवं आवश्यक पदार्थों के मूल्यों में वृद्धि होगी ।
सिंहे जीवे देव ब्राह्मण पूजास्यात् नराणां मान्यतासताम् ।
रोगाः विवादश्चान्योSन्यं चतुष्पदादि महर्घता ।।
 
पति सुख , धर्म , अध्यात्म, ब्राह्मण सन्त महापुरुष गुरुजन, संतान ,पुत्र, विद्या, विवेक-बुद्धि , बड़ा भाई, ज्योतिषी, सुवर्ण, आदि के 
गुरु वृहस्पति देव प्रतिनिधित्व करते हैं । अतः सिंह राशि के गुरु में उपर्युक्त विषयों से सम्बंधित कार्यों में वृद्धि के योग बनते हैं ।
अतः सिंह राशि के गुरु की इस अवधि में काफी लंबे समय से विवाह की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के विवाह होंगे । पति के साथ सम्बन्ध मधुर होंगे । धर्म अध्यात्म में जागरूकता बढ़ेगी । दीर्घ प्रतीक्षित लोगों को संतान सुख प्राप्ति के योग हैं ।
अतः ऐसे अवसर का लाभ उठाना चाहिए विवाह संतान की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए यह वर्ष विशेष महत्वपूर्ण होगा, ऐसे योग में संतान, विवाह आदि के निमित्त अनुष्ठान शीघ्र फलकारी होते हैं । अतः सिंहस्थ गुरु योग का शीघ्र लाभ लें ।
(कुछ मतों के अनुसार सम्पूर्ण सिंह के गुरु काल अवधि में यज्ञादि शुभ कार्यों का निषेध
किया गया है।
किन्तु कुछ प्रसिद्द मुहूर्त ग्रंथों में केवल सिंह राशि का नवांश काल 13 अंश -20 कला से 16 अंश-40 कला तक का ही निषेध माना है । अतः 14 सितम्बर से 30 सितम्बर 2015 तक का समय शुभ कार्यों में निषेध है ।
यथा -
सिंह राशौ सिंहांशे यदा भवति वाक्पतिः ।
सर्व देशे्ष्वयं त्याजो दम्पत्योर्निधनप्रदः ।।
शुभ मुहुर्त निकाल कर विधिवत गुरु गायत्री मंत्र का सवा लाख जपात्मक अनुष्ठान करना उत्तम फलप्रद रहेगा ।
गुरु गायत्री मन्त्र -
ॐ अंगिरो जाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात् ।।
सिंह राशि के गुरु तप शाधना पुरुश्चरण हेतु बहुत ही उपयुक्त कर्म फल सिद्धि दायक होते हैं ।
14 जुलाई 2015 से संवत् के अंत 7 अप्रैल 2016 तक सिंह राशि के गुरु का सभी 12 राशियों पर शुभ अशुभ प्रभाव इस प्रकार रहेगा -
1- मेष - गुरु वृहस्पति के पंचम भाव में होने से विद्या एवं सुख साधनों में वृद्धि होगी । किन्तु वाहन आदि से दुर्घटना, व्यर्थ विवाद के योग हैं । रविवार को पीली मिठाई वितरण करें ।
2- वृष- गुरु चतुर्थ भाव में होने से माता के स्वास्थ्य समस्या एवं कठिनाइयों के बाद धन संसाधनों की प्राप्ति होगी । मानसिक अशांति तनाव आदि बनेगा अतः वृहस्पतिवार को केसर युक्त खीर मंदिर में भोग लगाकर बाँटें ।
3- मिथुन - बनते कार्यों में अवरोध होगा । धार्मिक यात्रा बड़ी कठिनाई से संपन्न होगी । खर्च अधिक होंगे । आय में कमी होगी । किसी धार्मिक व्यक्तित्व से मार्गदर्शन व सहयोग लाभ प्राप्त होगा । ब्राह्मणों गुरुजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया करें ।
4- कर्क - दूसरे गुरु के संयोग से विगत रुका धन प्राप्त होगा । उन्नति के अवसर खुलेंगे । पुरानी शुरू की हुयी योजनाएं सिरे चढ़ेंगी । धर्मादि कार्यों में धन का सदुपयोग होगा । साधु ब्राह्मणों का सत्कार करें ।
5- सिंह -लग्न में वृहस्पति की स्थिति कुछ स्वास्थ्य समस्या दे सकते हैं । संघर्ष के बाद धनागम व शत्रु भय होगा । किन्तु धर्म कर्मादि में रूचि सक्रियता बढ़ेगी । केशर तिलक लगाया करें ।
6 - कन्या - बारहवें भाव में गुरु की स्थिति से व्यर्थ भाग दौड़ होगी । आय कम खर्च अधिक होंगे । कार्यों में व्यवधान एवं रोग, कष्ट मय चिंताएं बढ़ेंगी । अतः गुरु कवच के 1008 पाठ करें या कराएं ।
7- तुला - गुरु के लाभ भाव में होने से किसी महानुभाव के सहयोग से लाभ व प्रगति के मार्ग खुलेंगे । रुके कार्यों में सफलता प्राप्त होगी ।
विद्या आदि क्षेत्रों में लाभ सम्मान प्राप्त होगा । बड़े भाइयों का सहयोग मिलेगा । गले में स्वर्ण या पीला धागा पहनें ।
8-वृश्चिक - दशम गुरु के होने से व्यापारिक कार्यों में धीरे धीरे लाभ होगा मानसिक व शारीरिक श्रम ज्यादा करना पड़ेगा । नए योजना कार्यों में अनुमान से अधिक धन व्यय होगा । तनाव भी होगा पिता के स्वास्थ्य में प्रतिकूल असर होगा । अतः रविवार को बेशन के लड्डू श्री हनुमान जी के मंदिर में अर्पित करें ।
9 -धनु - धनु राशि वालों के लिए सिंह राशि के गुरु पूर्ण कल्याण कारक हैं । पिछली समस्त चिंताएं बाधाएं समाप्त होंगी ।भूमि वाहन आदि का लाभ होगा । अच्छे कार्यों में खर्च भी होगा । वृद्ध जनों को उपहार आदि देकर प्रसन्न करें उनसे आशीर्वाद लें ।
10- मकर - गुरु वृहस्पति अष्टम होने से कोई गम्भीर रोग ,गृह क्लेश तनाव एवं कार्यों में व्यवधान के योग हैं अतः 16 गुरु वार के व्रत एवं पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध ,दान आदि तीर्थ में जाकर करें ।
11-कुम्भ - सप्तमस्थ गुरु के प्रभाव से कार्य क्षेत्र में संघर्ष भी कड़ा करना पड़ेगा तब जाकर लाभ होगा । साझेदार, सहयोगियों की और से सावधान रहें । पत्नी के स्वास्थ्य में नकारात्मक प्रभाव आ सकता है । अतः गरीब निराश्रित बच्चों को यथा सामर्थ्य भोजन वस्त्र दें ।
12- मीन - वृहस्पति छटे होने से गुप्त शत्रु अचानक शारीरिक परेशानी बढ़ सकती है । धन का नुकशान हो सकता है । अज्ञात भय मानसिक समस्या बनेगा । अतः वृहस्पति बीज मन्त्र शांति प्रयोग श्रेष्ठ रहेगा ।
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गुरु वृहस्पति देव और भगवान सूर्य नारायण आपकी सद् मनोकामनाएं पूर्ण करें । इन्हीं शुभ कामनाओं के साथ ........
- आचार्य भगवती कृष्ण सेमवाल www.astrologersofindia.com