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वर्ष 2015 हिन्दू तीज -त्योहार :- -:

जनवरी :- 2015

०१ बृहस्पतिवार पौष पुत्रदा एकादशी
०५ सोमवार पौष पूर्णिमा
०८ बृहस्पतिवार सकट चौथ
१५ बृहस्पतिवार पोंगल , मकर संक्रान्ति
१६ शुक्रवार षटतिला एकादशी
२० मंगलवार मौनी अमावस
२४ शनिवार वसन्त पञ्चमी
२६ सोमवार रथ सप्तमी
२७ मंगलवार भीष्म अष्टमी
३० शुक्रवार जया एकादशी

फरवरी २०१५

०३ मंगलवार माघ पूर्णिमा
१३ शुक्रवार कुम्भ संक्रान्ति
१५ रविवार विजया एकादशी
१७ मंगलवार महा शिवरात्रि

मार्च २०१५

०१ रविवार आमलकी एकादशी
०५ बृहस्पतिवार होली , होलिका दहन
०६ शुक्रवार रंगवाली होली
१४ शनिवार बसोड़ा , शीतला अष्टमी
१५ रविवार मीन संक्रान्ति
१६ सोमवार पापमोचिनी एकादशी
१७ मंगलवार पापमोचिनी एकादशी
२० शुक्रवार सूर्य ग्रहण
२१ शनिवार चैत्र नवरात्रि , गुड़ी पड़वा , युगादी
२२ रविवार गौरीपूजा , गणगौर
२५ बुधवार यमुना छठ
२८ शनिवार राम नवमी
३१ मंगलवार कामदा एकादशी

अप्रैल २०१५

०४ शनिवार हनुमान जयन्ती , चन्द्र ग्रहण
१४ मंगलवार सोलर नववर्ष , मेष संक्रान्ति
१५ बुधवार बरूथिनी एकादशी
२० सोमवार परशुराम जयन्ती
२१ मंगलवार अक्षय तृतीया
२५ शनिवार गंगा सप्तमी
२७ सोमवार सीता नवमी
२९ बुधवार मोहिनी एकादशी

मई २०१५

०२ शनिवार नरसिंघ जयन्ती
०४ सोमवार बुद्ध पूर्णिमा
०५ मंगलवार नारद जयन्ती
१४ बृहस्पतिवार अपरा एकादशी
१५ शुक्रवार वृषभ संक्रान्ति
१७ रविवार वट सावित्री व्रत
१८ सोमवार शनि जयन्ती
२८ बृहस्पतिवार गंगा दशहरा
२९ शुक्रवार निर्जला एकादशी

जून २०१५

०२ मंगलवार वट पूर्णिमा व्रत
१२ शुक्रवार योगिनी एकादशी
१५ सोमवार मिथुन संक्रान्ति
२८ रविवार पद्मिनी एकादशी

जुलाई २०१५

१२ रविवार परम एकादशी
१६ बृहस्पतिवार कर्क संक्रान्ति
१८ शनिवार जगन्नाथ रथयात्रा
२७ सोमवार देवशयनी एकादशी
३१ शुक्रवार गुरु पूर्णिमा

अगस्त २०१५

१० सोमवार कामिका एकादशी
१७ सोमवार हरियाली तीज , सिंह संक्रान्ति
१९ बुधवार नाग पञ्चमी
२६ बुधवार श्रावण पुत्रदा एकादशी
२८ शुक्रवार वरलक्ष्मी व्रत
२९ शनिवार रक्षा बन्धन , नारली पूर्णिमा

सितम्बर २०१५

०१ मंगलवार कजरी तीज
०५ शनिवार कृष्ण जन्माष्टमी
०८ मंगलवार अजा एकादशी
१३ रविवार सूर्य ग्रहण
१६ बुधवार हरतालिका तीज
१७ बृहस्पतिवार गणेश चतुर्थी , कन्या संक्रान्ति , विश्वकर्मा पूजा
१८ शुक्रवार ऋषि पञ्चमी
२१ सोमवार राधा अष्टमी
२४ बृहस्पतिवार परिवर्तिनी एकादशी
२७ रविवार अनन्त चतुर्दशी , गणेश विसर्जन
२८ सोमवार भाद्रपद पूर्णिमा , चन्द्र ग्रहण , प्रतिपदा श्राद्ध

अक्टूबर २०१५

०८ बृहस्पतिवार इन्दिरा एकादशी
१२ सोमवार सर्वपित्रू अमावस्या
१३ मंगलवार नवरात्रि प्रारम्भ
१८ रविवार सरस्वती आवाहन , तुला संक्रान्ति
१९ सोमवार सरस्वती पूजा
२१ बुधवार दुर्गा अष्टमी , महा नवमी
२२ बृहस्पतिवार दशहरा , विजयदशमी
२३ शुक्रवार पापांकुशा एकादशी
२४ शनिवार पापांकुशा एकादशी
२६ सोमवार कोजागर पूजा , शरद पूर्णिमा
३० शुक्रवार करवा चौथ

नवम्बर २०१५

०३ मंगलवार अहोई अष्टमी
०७ शनिवार रमा एकादशी , गोवत्स द्वादशी
०९ सोमवार धन तेरस , काली चौदस
१० मंगलवार नरक चतुर्दशी
११ बुधवार दीवाली , लक्ष्मी पूजा
१२ बृहस्पतिवार गोवर्धन पूजा
१३ शुक्रवार भैया दूज
१७ मंगलवार छट पूजा , वृश्चिक संक्रान्ति
२१ शनिवार कंस वध
२२ रविवार देवुत्थान एकादशी
२३ सोमवार तुलसी विवाह
२५ बुधवार कार्तिक पूर्णिमा

दिसम्बर २०१५

०३ बृहस्पतिवार कालभैरव जयन्ती
०७ सोमवार उत्पन्ना एकादशी
१६ बुधवार विवाह पञ्चमी , धनु संक्रान्ति
२१ सोमवार मोक्षदा एकादशी ,9 गीता जयन्ती
२४ बृहस्पतिवार दत्तात्रेय जयन्ती
२५ शुक्रवार मार्गशीर्ष पूर्णिम

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ज्येष्ठ सोमवती अमावस्या। - 18 मई 2015 ,
आश्विन सोमवती अमावस्या - 12 अक्टूवर 2015
माघ सोमवती अमावस्या - 8 फरवरी 2016
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सोमवारेण संयुक्ता अमावस्या यदा भवेत् ।
तत्रानंत फलं श्राद्धं पितृणां दत्त भक्षयम् ।।
अर्थात् सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या पर पितृगणों के निमित्त किया गया श्राद्ध तर्पण दान अनन्त फल देने वाला यानि अक्षय होता है ।
* पितृ दोष एवं काल सर्प दोष शांति का सर्वोत्तम मुहूर्त है सोमवती अमावस्या 
पितृ दोष कैसे - सर्व प्रथम तो मैं यही कहूँगा की 
1-माता-पिता, 2-दादा- दादी, 3-नाना नानी आदि अपने बड़े बुजुर्गों की समुचित सेवा का अभाव सब कुछ होते हुए भी इनकी दुर्दशा होना उनका तिरस्कार होना एक दिन भयंकर पितृ दोष बनकर सामने होता है ।
उनके जीते जी यथा संभव समुचित सेवा करनी चाहिए ।
यह कदापि नहीं होना चाहिए जैसा की आजकल अधिकतर देखने को मिलता है कि --
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" जीवित माता पिता को दे न सके नीर और मृतक माता
पिता को हलवा खीर ..."
-----------------------------------------------------------------------कई लोग जीते जी तो कभी सीधे मुंह बात भी नहीं करते और मृत्यु उपरान्त उनकी वर्षी पर ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं बड़े लंगर छबील लगाते हैं जो सर्वथा गौण है ।
अतः ऐसे लोगों के पितृ दोष का कोई उपाय नहीं है ऐसे लोगों को जो बोया है एक दिन वही काटना पड़ेगा ।
पितृ दोष मुख्यतः यह है जिनका समाधान संभव है जिनके पूर्वज अकाल मृत्यु मरे हों , या जिनका अंतिम क्रिया उचित विधि से न हुयी हो या किसी भी पाप या दोष वश पूर्वजों की मुक्ति न हुयी हो तो ऐसे व्यतिथ अतृप्त अमुक्त पितृगण अपने वंशजों को चेतना स्वरूप अपनी मुक्ति हेतु स्वप्न या अन्य तरह से आकृष्ट करते हैं ।किन्तु जब वंशज उनकी अर्जित धन सम्पति मस्त रह कोई ठोस शाधन नहीं करते तो पितृ गण बहुत व्यथित होते हैं रुष्ट होते हैं परिणामतः शनैः शनैः कार्य व्यवसाय रोजगार , स्वास्थ्य, वंश वृद्धि, वैवाहिक आदि मंगल कार्यों में व्यवधान आने शुरू होते हैं जो एक दिन बहुत विकट समस्या बन जाती है अपने 25 वर्षों के प्रैक्टिकल जीवन में हमने ऐसे कई परिवार इस प्रकार से विकराल समस्या में देखे जो अब इस सीमा तक पहुँच गए जब कुछ नहीं कर सकते ।केवल दुष्परिणाम ही भोग सकते हैं ।
अतः बुद्धि मान वही होता है जो व्यर्थ के तर्कों में न पढ़कर समय रहते पुण्य पर्वों का लाभ लेकर पितृ दोष का शमन करवा लेना चाहिए ।
पितृ दोष निवारण में मुख्य विशेष उपाय 
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नारायण बलि, गया,पिहोवा, कुरूक्षेत्र बद्रीनाथ आदि तीर्थों में विधिवत श्राद्ध एवं 
"धन्या भागवती वार्ता प्रेतपीड़ा विनाशनी " वचन सार्थक करने वाली पतित पावनि श्री हरि चरित्र शुधामृत 
श्रीमद्भागवत सप्ताह परायण ज्ञान यज्ञ 
एवं मंदिर धर्मशाला आदि निर्माण करवाना गरीब असहायों के शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार संबधी सेवा सहयोग 
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सामान्य उपाय -
प्रति पुण्य तिथि पर ब्राह्मण एवं गाय आदि को यथा सामर्थ्य भोजन वस्त्र दक्षिणा देना ।
अमावस्या एवं पुण्य तिथि पर अन्न आदि सामग्री धर्म स्थान अथवा गौशाला में दान या लंगर भंडारा ।
गौशाला में सेवा सहयोग 
पंछी जानवरों को समय समय पर जल आहार प्रदान करना
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अथवा 
सोमवती अमावस्या पर 
पितृ गणों की तृप्ति प्रसन्नता हेतु गंगा स्नान ,तर्पण , अन्न, जल, वस्त्र, शैय्या ,गौ आदि का दान करना एवं वट वृक्ष की सफेद सूत लपेटते हुए 11, 21,51,या 108 परिक्रमा करना भी एक श्रेष्ठ उपाय है ।
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सोमवती अमावस्या पर काल सर्प दोष शांति हतु भी उत्तम मुहूर्त है इस अवसर पर राहुमन्त्र केतुमन्त्र एवं नाग गायत्री मन्त्र का विधिवत जप अनुष्ठान व सर्प युगल जल विसर्जन कर काल सर्प दोष की शांति करवानी चाहिए ।काल सर्प दोष शांति अनुष्ठान अपने घर,मंदिर, गंगा तट आदि तीर्थ स्थानों पर कर सकते हैं ।
किन्तु तीर्थों में भी आजकल अव्यवस्था का माहौल देखने को मिलता है ।
अतःऐसे किसी भी शांति अनुष्ठान हेतु सर्वथा उपयुक्त स्थान वह है जहाँ पर योग्य ब्राह्मणों द्वारा पूर्ण विधि एवं शांति से अनुष्ठान सम्पन हो सके ।
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सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव को भी प्रसन्न किया जा सकता है
इस शुभ अवसर पर योग्य वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा विधिवत् रुद्राभिषेक एवं रुद्राष्टाध्यायी के नमक चमक विधि से पाठ करवाने से भी शीघ्र ही मनोकामना की पूर्ती होती है ।
रुद्राभिषेक करें-
* धन प्राप्ति हेतु गन्ने के रस से और शहद से 
* संतान विषयक कामना हेतु गौ के दूध से 
* रोग निवारण हेतु गिलोय के रस और कुशा के रस से 
* वंश वृद्धि हेतु गाय के घी से 
* प्रमेह रोग निवारण व सर्व कामनाओं की पूर्ति हेतु दूध से * शत्रु नाश हेतु सरसों के तेल से ....।
भगवान शिव के 11 ,21,51,108 ,1008, सवा करोड़ संख्या में श्री पार्थिव शिव लिंगार्चन भी कलियुग में विशेष कर त्वरित फलदायक महान दिव्य प्रयोग है ।
( पुण्यप्रद सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर उपर्युक्त उपाय पितृ दोष शांति , काल सर्प दोष शांति एवं रुद्राभिषेक आदि दिव्य अनुष्ठान पूर्ण वैदिक विधि से संपन्न करवाने हेतु हमारे संस्थान में पूर्ण उचित व्यवस्था है ।संपर्क करें - 9464612003 )
भगवान शिव आपकी सद् मनो कामना पूर्ण करें ।
- आचार्य भगवती कृष्ण सेमवाल